“संभल में सरकारी भूमि पर बनी मस्जिद ध्वस्त, अवैध कब्जे और पोस्टर-झंडे मिलने पर FIR”

“संभल में सरकारी भूमि पर बनी मस्जिद ध्वस्त, अवैध कब्जे और पोस्टर-झंडे मिलने पर FIR”

Mosque built on government land in Sambhal demolished

Mosque built on government land in Sambhal demolished

संभल। Mosque built on government land in Sambhal demolished, तहसील क्षेत्र के गांव कसेरुआ में सरकारी भूमि पर बने मुस्तफा कादरी मस्जिद के ढांचे को रविवार को दूसरे दिन भी ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी रही।

शनिवार को मस्जिद के अग्रभाग, पिलर और 55 फीट ऊंची मीनार गिराए जाने के बाद शेष हिस्से को भी बुलडोजर से ढहा दिया गया। भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में शाम तक पूरी मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया। प्रशासन ने मस्जिद प्रबंधक पर एक लाख 12 हजार 800 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

गांव कसेरुआ में गाटा संख्या 409 कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है, लेकिन इस भूमि पर एक मस्जिद और तीन मकान बने हुए थे। इसके अलावा गाटा संख्या 410, जो खाद के गड्ढे की भूमि है, उस पर करीब 600 वर्गमीटर क्षेत्र में आठ मकान बने हुए हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश पर इस भूमि की जांच कराई गई थी।

जांच में स्पष्ट हुआ था कि 409 कब्रिस्तान की करीब 1200 वर्ग मीटर भूमि में से 120 वर्ग मीटर भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश पारित किया गया था।

कहा कि मस्जिद कमेटी की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। शनिवार को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल, एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई के साथ एसडीएम सहित राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी।

Masjid

प्रशासन ने बुलडोजर और हाइड्रा मशीन की मदद से मस्जिद के आगे हिस्से तथा पिलर सहित 55 फीट ऊंची मीनार को खींचकर ध्वस्त कराया था। इसके बाद रविवार को बची हुई दीवारों और अन्य निर्माण को हटाने का कार्य किया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम रहे।

मौके पर पांच थानों की पुलिस के अलावा लगभग 60 पीएसी जवान तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई, जिससे विरोध उत्पन्न न हो। ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान आसपास के लोगों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया।

तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शाम तक मस्जिद के पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मस्जिद प्रबंधक जाकिर हुसैन पर एक लाख 12 हजार 800 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

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बताया कि सरकारी भूमि पर मस्जिद के रूप में कब्जा इन्हीं के माध्यम से किया गया था। राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि सरकारी और कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी सावधानी के साथ की गई।

मस्जिद के आसपास घनी आबादी होने के कारण मशीनों का संचालन बेहद सतर्कता से कराया गया, जिससे किसी आवासीय भवन को नुकसान न पहुंचे। इसी वजह से कार्रवाई को दो दिनों में पूरा किया गया।

तहसीलदार ने बताया कि शासन की मंशा स्पष्ट है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संभल में भी शासन के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जा रही है। सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए भवनों और कब्जों को चिह्नित किया जा रहा है।

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मस्जिद में मिला पाकिस्तानी झंडा, आठ पर प्राथमिकी

नखासा थाना क्षेत्र के गांव कसेरुआ में शनिवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान मुस्तफा कादरी मस्जिद परिसर से मिले पोस्टरों और एक झंडे को लेकर पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। बताते हैं कि बरामद सामग्री के माध्यम से सांप्रदायिक माहौल प्रभावित करने और समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया।

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई को मस्जिद के अंदर से 49 पोस्टर मिले थे, जिन पर आई लव मोहम्मद लिखा हुआ था। इसके अलावा एक झंडा भी मिला, जिस पर अर्धचंद्र और सितारे का निशान बना हुआ था। यह झंडा पाकिस्तानी झंडे जैसा प्रतीत हो रहा है। इसके बाद थाना नखासा पुलिस ने बीएनएस की धारा 353(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

उपनिरीक्षक अरुण कुमार की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कहा गया है कि बरामद सामग्री के माध्यम से समाज में वैमनस्यता फैलाने तथा सांप्रदायिक सौहार्द्र को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने सभी पोस्टर और झंडे को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

मामले में मुतव्वली जाकिर, जाकिर हुसैन, तस्लीम, भूरे अली, शरफद्दीन, दिल शरीफ, मोहब्बत अली और नन्हें के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी आरोपित गांव कसेरुआ के निवासी हैं।

मालूम हो कि जाकिर हुसैन, तस्लीम, भूरे, शरफद्दीन, दिल शरीफ, मोहम्मद अली और नन्हें के खिलाफ 18 जनवरी 2026 को लेखपाल खाबर हुसैन की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में मस्जिद को धोखाधड़ी कर सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज कराने का आरोप लगाया गया था।